नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। प्रयागराज में हर साल कुंभ लगता है। लेकिन इस साल महाकुंभ लगने जा रहा है। ये शाही मेला 13 जनवरी से शुरू होने जा रहा है। यह मेला 26 जनवरी 2025 तक चलेगा। महाकुंभ मेले का आयोजन हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दौरान श्रद्धालु गंगा नदी में स्नान करते हैं। महाकुंभ में होने वाले स्नान को भी शाही स्नान कहा जाता है। अगर आप भी महाकुंभ में आने की योजना बना रहे हैं तो इससे जुड़े सारे नियमों के बारे में जरूर जान लें।
महाकुंभ का पहला नियम
महाकुंभ मेले में स्नान करने का ही मुख्य नियम होता है। आपको बता दें कि सबसे पहले महाकुंभ में सबसे पहला स्नान नागा साधु करते हैं, इसके बाद अखाड़े के अन्य साधु संतों का स्नान होता है, और फिर अंत में आम श्रद्धालुओं को स्नान करने की अनुमति मिलती है। ये धार्मिक परंपरा कई सदियों से चली आ रही है। इसलिए किसी भी श्रद्धालु को साधु संत से पहले स्नान करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
महाकुंभ का दूसरा नियम
महाकुंभ जाने से पहले आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए अगर आप गृहस्थ हैं तब आपको स्नान करते समय 5 डुबकी लगाना चाहिए। ऐसा मन जाता हैं कि अगर आप 5 से काम डुबकी लगाते हैं तो आपका स्नान अधूरा मन जाता है।
महाकुंभ का तीसरा नियम
महाकुंभ में स्नान करने के बाद आपको सूर्य भगवान को जल अर्पित करना चाहिए। स्नान करते समय आप हाथ में जल लेकर सूर्या देवता का मंत्र का उच्चारण करते हुए जल को नीचे अर्पित करें। ऐसा करने से आपके घर परिवार में भगवान की कृपा बानी रहती है।
महाकुंभ का चौथा नियम
महाकुंभ में स्नान करने के बाद आपको दान जरूर करना चाहिए क्योंकि गंगा स्नान करने के बाद दान करने से जीवन में सुख समृद्धि आती है। इसके साथ ही आपको महाकुंभ के समक्ष प्रसिद्ध लेटे हनुमान जी मंदिर और वासुकी नाग मंदिर के दर्शन करने की विशेष मान्यता है।





